पटना : बिहार में मानसून के आगमन से पहले सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को जल संसाधन विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि केवल दफ्तर में बैठकर काम करने से स्थिति नहीं सुधरेगी, अधिकारियों को फील्ड में जाकर वास्तविक हालात का निरीक्षण करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसी क्षेत्र से लापरवाही की शिकायत मिली तो सीधे कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मंत्री का रुख बेहद कड़ा दिखाई दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि तटबंधों, नहरों, स्लुइस गेट और जल निकासी परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय मानी जाएगी।
मंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी फील्ड में जाकर स्थिति का आकलन करना है। गांवों और शहरों में जाकर लोगों से संवाद करें, उनकी समस्याएं समझें और जलभराव व बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करें। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “क्षेत्रीय अधिकारी का असली कार्यालय उसका फील्ड होता है, केवल दफ्तर में बैठकर जिम्मेदारियां पूरी नहीं की जा सकतीं।”
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मानसून शुरू होने से पहले सभी संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार कर ली जाए। जहां तटबंध कमजोर हैं या जलभराव की आशंका अधिक है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। साथ ही राहत और बचाव कार्यों की तैयारी पहले से सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कम से कम दो से तीन स्तर के अधिकारियों को मौके पर जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचनी होगी, ताकि समय रहते खामियों को दूर किया जा सके।
सरकार की इस सख्ती को मानसून पूर्व तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हर साल बिहार के कई जिले बाढ़ और जलजमाव की समस्या से प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार इस बार पहले से तैयारी कर किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने की रणनीति पर काम कर रही है।